जिलाधिकारी ने ली जिला गंगा संरक्षण समिति की बैठक

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-घाटों को गोद दियेे जाने के सम्बन्ध में आम सहमति बनाने पर चर्चा
-अप्रैल से नियमानुसार की जाएगी घाटों को गोद देने की प्रक्रिया
-घाटों को गोद देने के लिए स्थानीय संस्थानों को दी जाएगी वरीयता

हरिद्वार। जिलाधिकारी हरिद्वार सी रविशंकर की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट कार्यालय रोशनाबाद में जिला गंगा संरक्षण समिति की बैठक आयोजित की गयी। बैठक में विभिन्न बिन्दुओं पर चर्चा की गयी। बैठक में गंगा के किनारे स्थित निर्मित किये जा रहे घाटों के रख-रखाव के सम्बन्ध में इच्छुक गैर सरकारी संस्थाओं को घाटों को गोद दियेे जाने के सम्बन्ध में आम सहमति बनाने पर चर्चा की गयी। जिलाधिकारी ने कहा कि जिन घाटों को गोद दिया जाएगा, उनके व्यावसायिक उपयोग की अनुमति नहीं दी जाएगी, घाट पर बोर्ड लगाया जाएगा जिसमें सार्वजनिक रूप से गंगा स्वच्छता के लिए क्या करें, क्या न करें लिखा जाएगा। घाट को गोद लेने वाली संस्था की पूर्णं जिम्मेदारी होगी कि वह संबंधित घाटों पर साफ-सफाई, सुरक्षा आदि की माॅनीटरिंग भी करेंगे। इस कार्य में जिला प्रशासन द्वारा भी हरसंभव सहायता प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि घाटों को गोद देने के लिए स्थानीय संस्थानों को वरीयता दी जाएगी। घाटों को गोद देने की प्रक्रिया आगामी अप्रैल से नियमानुसार की जाएगी। अधिशासी अभियंता जलसंस्थान अजय कुमार के एसटीपी से ट्रीटेट पानी को व्यावसायिक बिल्डिंग कंसट्रक्शन में इस्तेमाल करने के सुझाव पर जिलाधिकारी ने कहा कि आगामी कुंभ मेले में होने वाले निर्माण कार्याें के लिए ट्रीटेट वाटर प्रयोग करने का प्रस्ताव कंुभ मेलाधिकारी को भेजने के निर्देश दिये। ट्रीटेट वाटर के कंसट्रक्शन कार्यों में प्रयोग से पेयजल की भी बचत होगी। गंगा संरक्षण की बैठक अन्यत्र किये जाने के प्रस्ताव पर जिलाधिकारी ने कहा कि जल्द ही किसी घाट पर ही बैठक की जाएगी, जिससे लोगों को गंगा संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। उन्होंने उपस्थित सभी स्वयंसेवी सस्थाओं द्वारा गंगा संरक्षण हेतु किये जाने वाले कार्याें के लिए उन्हें बधाई देते हुए कहा कि इस कार्य में अधिक से अधिक जन भागीदारी होनी चाहिए, इसके लिए स्थानीय स्कूल, काॅलेज, अखाडों, औद्योगिक संस्थानों आदि का सहयोग भी लिया जा सकता है। बैठक में गंगा संरक्षण से जुड़े विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा सीवर का गंदा पानी गंगा में जाने से रोकने, स्थानीय स्तर पर समिति बनाने जिनमें स्थानीय पार्षद आदि के सहयोग से माॅनीटरिंग करने, रामेश्वर गौड द्वारा सूखी नदी के पास शौचालय की खराब स्थिति, अनटेप नालों के गंगा में गिरने आदि की समस्याओं से अवगत कराया गया। जिलाधिकारी ने पाॅल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अधिकारियों को सर्वे करने तथा सर्वे के उपरांत किन संस्थानों द्वारा सीवरेज इत्यादि का गंदा पानी गंगा में डाला जा रहा है, की सूची देने तथा नियमानुसार कड़ी कार्यवाही करने के निर्देश दिये। निर्माण एवं अनुरक्षण ईकाई से टेप व अनटेप नालों की सूची शीघ्र उपलब्ध कराने को कहा। जिलाधिकारी ने प्रत्येक 15 दिन में एक बैठक आयोजित करने तथा बैठक में अनुपस्थित अधिकारियों परी कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि आगामी बैठकों में अनुपस्थित तथा अपूर्ण जानकारी के साथ बैठक में प्रतिभाग करने वाले विभागों/अधिकारियों के विरूद्ध कड़ी कार्यवाही की जाएगी। बैठक में शांतिकुंज प्रतिनिधि द्वारा जिलाधिकारी को शाॅल औढाकर तथा बीइंग भागीरथी संस्था के प्रतिनिधि द्वारा पौधा भेंट कर सम्मानित किया गया। बैठक में अधिशासी अभियंता पेयजल मौ मीसम, गायत्री परिवार शांतिकुज के प्रतिनिधि हरिमोहन गुप्ता, गुरूकुल कांगडी से डा डी.एस. मलिक, परियोजना अभियंता निर्माण एव अनुरक्षण ईकाई दीक्षा नौटियाल, स्पर्श गंगा, स्वंय बींइग भागीरथ सहित विभिन्न संस्थाओं के सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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