लोकतान्त्रिक अधिकार के लिए सत्याग्रह

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देहरादून। जन हस्तक्षेप बैनर तले उत्तराखंड के जन संगठन और विपक्षी दलो ने दिल्ली दंगों में मारे गए लोगों के प्रति श्रद्दांजलि देते हुए नागरिकता के सवाल पर सत्याग्रह किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा की दिल्ली में दंगों की वजह से 47 लोगों की मौत हो गयी है। जिसमें ग्राम रोख़ड़ ढाईजुली चाकी सैंण का दिलवर भी शहीद हुये है। ज़िम्मेदार नेता और संगठनों पर तुरंत सख्त करवाई करने की ज़रूरत है। सरकार जिस तरह से लोगों की नागरिकता पर सवाल खड़ा कर रही है, उससे 90 प्रतिशत लोगों पर नुक्सान होने वाला है। एक भ्रम खड़ा किया गया है कि एनआरसी प्रक्रिया का कोई ड्राफ्ट तैयार नहीं हुआ है और इन कदमों से बहुसंख्यक लोगों पर कोई असर नहीं होने वाला है। जबकि सच्चाई यह है की ड्राफ्ट की ज़रूरत नहीं है, नागरिकता नियमावली में सारे प्रावधान पहले से ही है। उन प्रावधानों कि अमल से गोरखा समाज, उत्तराखंड की महिला, संत समाज और बहुत सारे अन्य भारत वासियों पर नकारात्मक असर होने वाला है। उत्तराखंड सरकार एनपीआर बनाने का प्रक्रिया शुरू कर रही है। कानून के अनुसार राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) बनाने से ही राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इसलिए उस प्रक्रिया को रोकने के लिए नियमावली में तुरंत संशोधन लाया जाये, इसकी ज़रूरत है। धरने पर बैठने वालो मे मुख्य रूप से राजनैतिक दलों की तरफ से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव समर भंडारी; भारतीय नेशनल कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय, जोत सिंह बिष्ट, राजेंद्र भंडारी, याकूब सिद्दीकी, उत्तराखंड क्रांति दल से वरिष्ठ नेता लताफत हुसैन; समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर एसएन सचान; मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता बची राम कंसवाल; तृणमूल कांग्रेस के राज्य संयोजक राकेश पंत, जन संगठनों की तरफ से उत्तराखंड महिला मंच से कमला पंत, निर्मला बिष्ट; चेतना आंदोलन से शंकर गोपाल; परिवर्तनकामी छात्र संगठन से कैलाश शामिल थे। कार्यक्रम में अशोक कुमार, पप्पू कुमार, सुनीता देवी, प्रभु पंडित और सैकड़ों लोग शामिल रहे।

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