स्वस्थ तन के लिए एक स्वस्थ मन का होना भी आवश्यक होता है।

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आज के इस मशीनी युग में आदमी स्वास्थ्य के प्रति जरा सा सजग और जागरूक तो हुआ है,परन्तु इनकी संख्या संतोषजनक नही है।
एक स्वस्थ तन के लिए एक स्वस्थ मन का होना भी आवश्यक होता है। आज की इस भागदौड़ में इंसान धन सम्पति पाने के लिए किसी भी हद तक जा रहा है।परन्तु मानसिक शांति कही नही मिलता। और गाहे बगाहे अपने आस पास लोगों को ये कहते हुए हम रोज सुनते है कि खाने को समय नही मिलता, व्यायाम के लिए कहाँ से समय निकालें।यह सोच स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही को ही नही बल्कि कई बीमारियों को आमंत्रित करने का मौका भी देता है। क्योंकि सोच के अनुरूप ही शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कार्य करता है

स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है यह उक्ति यूँ ही नही कहा गया है।
यदि आपके पास अथाह धन सम्पति है परन्तु स्वास्थ्य नही है तो आपका धन आपके बच्चों को आरामतलबी के अलावा निठल्ला भी बना सकता है। इसीलिए धन के पीछे नही स्वास्थ्य के पीछे भागना चाहिए।

यदि तन चंगा है तो जितनी भी अर्जन है वह अपने आधाररभूत जरूरतों के लिए पर्याप्त हो सकता है।बच्चों के लिए बंगला,गाड़ी एवं अन्य सुख सुविधा के लिए बेवजह चिंतित होना व्यर्थ है।
आप जरा सोचिए,ये सारी सुख सुविधा जो आप अपने बच्चों को देना चाहते है, क्या वो आपको पूर्व से ही मिला था?
या आपने अपने मेहनत के बूते हासिल किया।
यदि आप संघर्ष करके एक सफल व्यक्ति बन सकते है तो आप भी अपने बच्चों को संघर्ष करने का अवसर दीजिए,उन्हें अपनी किस्मत को खुद तराशने दीजिए।तभी जिंदगी में आने वाली हर उतार-चढ़ाव का सामना वो निडरता से करने और विपरीत परिस्थितियों को अपने अनुकूल ढाल सकने में सक्षम होंगे। अन्यथा की स्थिति मेंआज के मोबाइल युगीन बच्चे जरा सी बात पर बिदक कर हताश,निराश,क्रोधी,अवसादी हो नशे की ओर बढ़ रहें हैं,जो परिवार और समाज के लिए बड़ा घातक है।
आज ही अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य के विषय में सकारात्मक कदम उठाएं। यह भी उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य का भोजन से भी बड़ा गहरा ताल्लुक है,डॉक्टर,वैध,हकीम वसा रहित सादा भोजन,जंक फूड से दूर रहने,गुनगुना पानी पीने एवं शारीरिक रुप से सक्रिय रहने की सलाह देते है।
यदि शरीर के इंजन को सही मात्रा में भोजन नही मिलता है तो इंसान कुपोषित होकर काल का ग्रास बन जाता है,और अधिक मात्रा में भोजन ग्रहण करें तो तन को बीमारियों का मनपसंद जगह बना लेता है,अतः जितना कम भोजन करो तन उतना ही अधिक स्वस्थ रह सकता है। भोजन में संयम स्वस्थता की दृष्टिकोण से बहुत जरूरी है।
पुरुष हो या औरत घर के छोटे छोटे कामों को खुशी के साथ यह सोचकर करना चाहिए कि हमारा तन पहले से अधिक स्वस्थ एवं खूबसूरत होगा।सकारात्मक सोच भी सही मात्रा में भोजन की तरह तन को निरोगी रखने में मदद करता है।

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