गहन मंथन के बाद भाजपा ने बंशीधर भगत को सौंपी प्रदेश अध्यक्ष की कमान

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हल्द्वानी। कालाढूंगी विधायक बंशीधर भगत को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंप दी गई है। देहरादून में हुई गहन मंत्रणा के बाद उन्हें यह पद सौंपा गया। उनके अध्यक्ष बनने की घोषणा से कार्यकर्ताओं में उत्साह की लहर दौड़ गई। लोक सभा चुनाव में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट की जीत के साथ पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बदलना तय था। इसे लेकर पूर्व में चुनाव दिसंबर महीने में होना था। लेकिन नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के समर्थन में जनजागरण अभियान के चलते पार्टी ने चुनाव टाल दिए गए। इस बीच केंद्रीय नेताओं की मौजूदगी में प्रदेश अध्यक्ष के पैनल को लेकर प्रदेश भाजपा कार्यालय में पार्टी के कोर ग्रुप की बैठक में संभावित दावेदारों के नामों पर विचार हुआ था।

पैनल के नाम केंद्रीय नेतृत्व भेज दिए गए थे। प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव सर्वसम्मति होने के आसार हैं। पार्टी क्षेत्रीय और जातीय समीकरण के आधार पर नया कप्तान चुनेगी। वर्तमान में प्रदेश सरकार की बागडोर त्रिवेंद्र सिंह रावत के हाथों में है। रावत गढ़वाल से हैं और क्षत्रिय हैं। इस आधार पर संगठन की कमान कुमाऊं से ब्राह्मण नेता के हाथों सौंपने की संभावना थी। प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में सांसद व प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट के अलावा पूर्व कैबिनेट मंत्री व विधायक बंशीधर भगत, कैलाश जोशी, केदार जोशी और कैलाश पंत के नाम प्रमुख थे। इस दौड़ में बंशीधर भगत को सबसे आगे देखा जा रहा था।

गुरूवार को केंद्रीय पर्यवेक्षक अर्जुन राम मेघवाल और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की मौजूदगी में हुई मंत्रणा के बाद अध्यक्ष पद पर कालाढूंगी विधायक बंशीधर भगत के नाम का ऐलान कर दिया गया। बंशीधर भगत 6 बार विधायक बन चुके है। वह वर्ष 1975 में जनसंघ पार्टी से जुड़े। इसके बाद उन्होंने किसान संघर्ष समिति बनाकर राजनीति में प्रवेश किया। राम जन्म भूमि आंदोलन में वह 23 दिन अल्मोड़ा जेल में रहे। वर्ष 1989 में उन्होंने नैनीताल-ऊधमसिंह नगर के जिला अध्यक्ष का पद संभाला। वर्ष 1991 में वह पहली बार उत्तर प्रदेश विधानसभा में नैनीताल से विधायक बने। फिर 1993 व 1996 में तीसरी बार नैनीताल के विधायक बने। इस दौरान उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार में खाद्य एंव रसद राज्यमंत्री, पर्वतीय विकास मंत्री, वन राज्य मंत्री का कार्यभार संभाला। वर्ष 2000 में राज्य गठन के बाद वह उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री रहे। वर्ष 2007 में हल्द्वानी विधानसभा वह चौथी बार विधायक बने। उत्तराखंड सरकार में उन्हें वन और परिवहन मंत्री बनाया गया। इसके बाद 2012 में नवसर्जित कालाढूंगी विधानसभा से उन्होंने फिर विजय प्राप्त की। फिर वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में छठीं जीत दर्ज की। वर्तमान मेें वह विधानसभा की प्रतिनिहित विधायन समिति के अध्यक्ष पर पर कार्य कर रहे है।

वहीं वह वर्तमान त्रिवेंद्र सरकार में भी मंत्री पद के प्रबल दावेदार थे, लेकिन उन्हें वेटिंग लिस्ट में रहना पड़ा। अब उन्हें अध्यक्ष पद पर सुशोभित कर केंद्रीय नेतृत्व ने उनका कदम बढ़ाने का कार्य भी किया है।

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