पात्र वनवासियों को मिले वनाधिकार अधिनियम का लाभ : सविन बंसल

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हल्द्वानी 20 फरवरी । वनों में निवास करने वाले अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परम्परागत वन निवासियों को वन अधिकार अधिनियम 2006 में निहित अधिकार दिये जाने के सम्बन्ध में जिलाधिकारी श्री सविन बंसल की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। जिलाधिकारी श्री बंसल ने जिला समाज कल्याण अधिकारी को निर्देश दिए कि वे वन अधिकार अधिनियम के प्रति वन ग्राम वासियों को जागरूक कर अधिक से अधिक दावे ग्राम स्तर से बनवाकर उप समिति को प्रस्तुत कराये। ताकि पात्र वनवासियों को वनाधिकार अधिनियम का लाभ दिया जा सके।
श्री बंसल ने निर्देश देते हुए कहा कि वन अधिकार अधिनियम के तहत सबसे पहले ग्राम स्तरीय समितियों का गठन किया जाये और उन्हें जागरूक करते हुए उनके अध्यक्ष व सचिव का चुनाव कराकर वनाधिकार फार्म भरवाते हुए पुख्ता साक्ष्य लगाकर उप खण्ड (तहसील) स्तरीय कमेटी में प्रस्तुत करें। उन्होंने बताया कि अधिनियम के अनुसार वन ग्रामों में रह रहे अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परम्परागत वन निवासी व्यक्तिगत अथवा सामुदायिक रूप से दावे प्रस्तुत कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि व्यक्तिगत दावा प्रस्तुत करने हेतु प्रपत्र ’’क’’ भरना होगा और उसके साथ पुख्ता साक्ष्य भी लगाने होंगे। इसी प्रकार सामूहिक दावे प्रस्तुत करने हेतु प्रपत्र ’’ख’’ भरना होगा जिसमें सामूहिक साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे। वन ग्राम वासियों को साक्ष्य उपलब्ध कराने में राजस्व व वन विभाग पूरा सहयोग प्रदान करना सुनिश्चि करे।
जिलाधिकारी श्री बंसल ने जिला समाज कल्याण अधिकारी को निर्देश दिए कि वे वनाधिकार अधिनियम की जन जागरूकता हेतु प्रचार प्रसार करें तथा जो पूर्व में वन ग्राम वासियों द्वारा दावे प्रस्तुत किये गये हैं, उनकी आपत्तियों का निराकरण कराकर उप खण्ड स्तरीय समिति में प्रस्तुत करायें। इस हेतु जिला पंचायत राज अधिकारी का सहयोग लिया जाये। श्री बंसल ने कहा कि ग्राम वासियों को जागरूक करें तथा ग्राम स्तर पर खुली बैठकें करें ताकि अधिक से अधिक पात्र व्यक्तियों के दावे साक्ष्यों के साथ प्राप्त हो सकें।
बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी नितीश मणि त्रिपाठी, हिमांशु बागरी, उप जिलाधिकारी विवेक राय, अनुराग आर्य, उप प्रभागीय वनाधिकारी यूसी तिवारी, केसी तिवारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी अमन अनिरूद्ध, ध्रुव मर्तोलिया, सचिव पीपुल्स फाॅर टैक्नोलाॅजी चन्द्र प्रकाश लखेड़ा, मनोज डबराल, शान्तनु बडोला आदि मौजूद थे।

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