खूनी फ्लाईओवर के नाम से बदनाम हो गया बल्लीवाला फ्लाईओवर

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दुर्घटनाओं को दावत देता बल्लीवाला फ्लाईओवर

देहरादून। बल्लीवाला के खूनी फ्लाईओवर पर अब किसी प्रयोग की भी जगह नहीं बची है। सरकार इसके समानांतर फ्लाईओवर की अनुमति देने के मूड में भी नजर नहीं आ रही है। बजट की कमी को इसका कारण बताया जा रहा है। वर्ष 2016 में बल्लीवाला फ्लाईओवर बनने के बाद आस जगी थी कि यहां जाम और बेवजह वाहनों के दबाव से मुक्ति मिलेगी। लेकिन, बनने के बाद सहूलियत देना तो दूर उल्टा इसके कारण दुर्घटनाओं को दावत देना शुरू कर दिया।

नतीजा यह हुआ कि एक के बाद एक दुर्घटना होने से यह फ्लाईओवर खूनी फ्लाईओवर के नाम से बदनाम हो गया। इसके बाद दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने को शुरू हुआ प्रशासन के प्रयोगों का दौर। लेेकिन, इन प्रयोग से भी कोई निजात नहीं मिल सकी। लिहाजा, शासन ने भी इस पर संज्ञान लिया और बात एक पीआईएल के माध्यम से हाईकोर्ट तक जा पहुंची। हाईकोर्ट ने भारी भरकम आदेश दिए तो लगा कि शायद अब मुक्ति मिल जाएगी। इसके समानांतर फ्लाईओवर बनाने की बात शुरू हुई तो लोक निर्माण विभाग के राजमार्ग खंड ने इसका इस्टीमेट भी तैयार कराया। शासन बजट के अभाव में समानांतर फ्लाईओवर बनाने को अनुमति देने के मूड में नजर नहीं आ रहा है।

यही कारण है कि एक साल बाद भी विभाग के इस्टीमेट वाले पत्र का कोई जवाब शासन से नहीं आ सका है। चूंकि, अब कोई प्रयोग नहीं बचा तो इसे यूं ही बदनाम होने के लिए छोड़ा जा रहा है। अब तक जो प्रयोग हुये उनमे सब वे श्रेणी से भी संकरे इस फ्लाईओवर पर जबरदस्ती प्लास्टिक के डिवाइडर लगाए गए।, कुछ दिन बाद सेफ्टी वॉल पर जाल लगाए गए, ताकि कोई दुर्घटना न हो।, चेतावनी के लिए लाइट भी लगाई गई, जो आए दिन खराब रहती है।, पिछले साल यहां 17 जगह मल्टीपल स्पीड ब्रेकर लगाए गए।, विरोध हुआ तो आधे स्पीड ब्रेकरों को तोड़ा गया।

फ्लाईओवर से कोई टर्न न ले इसके लिए प्लास्टिक डिवाइडरों को आगे तक बढ़ाया गया।, शामिल हैं। फ्लाईओवर पर जब कोई हादसा होता है तभी इसकी याद आती है। उसी के बाद यहां कुछ प्रयोग किए जाते हैं। लेकिन, इसके बाद न तो प्रशासन को और न ही शासन को। किसी को इसकी याद नहीं आती है।

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