खुद को खुद से जोड़ता है ‘एकांतवास’

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लोगों को कभी न कभी एकांत और शांति की आवश्यकता होती है। सभी के जीवन में एक समय ऐसा आता है जब व्यक्ति खुद के साथ कुछ समय बिताना चाहता है। हालांकि, अक्सर अकेले रहने वाले व्यक्ति को देखर लोग उसे डिप्रेशन का नाम देते हैं। लेकिन अब एक नई स्टडी ने इस बात को गलत साबित कर दिया है। शोधों पर नजर डालें तो जो बच्चे एकांत में रहना चाहते हैं, वो अपने आप को बेहतर तरीके से समझ पाते हैं और खुद को स्वीकार करने के अधिक सक्षम होते हैं।

इस व्यस्त सी जीवनशैली में हम अक्सर खुद के लिए समय नहीं निकाल पाते। और हर व्यक्ति के लिए एकांत में रहना और खुद को समय देना बहुत ज़रूरी है। एक व्यक्ति चाहे जितना भी खुला और बहिर्मुखी क्यों न हो, उसे भी ऐसे समय की ज़रूरत पड़ती है जहाँ वो कुछ समय खुद के लिए बिता सके। यहाँ अकेल या एकांत में रहने से हमारा मतलब ये नहीं है कि आप खुद को सबसे के अलग करके एकदम अकेले रहे। पर हमारा मतलब ये की आप अपने लिए समय निकले। इस भागदौड़ और इस व्यस्त समय में जानिए की क्यों जरूरी है अकेले समय निकालना।

जब आप अकेले होते हैं तो आपको आपके अपनों से जुड़ने का भरपूर समय मिलता है। सबसे बड़ी बात, जो आप हैं, वही रहने का मौका मिलता है. दूसरों से बातें करना बहुत आम है, पर खुद से बातें करना थोड़ा अलग होता है. जिसके अपने अलग फायदे हैं। अकेलापन आपको, आपकी ही खोज में मदद करता है और एक बेहतर इंसान बनाने का मार्ग प्रशस्त करता है. आज की भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में किसी के पास खुद के लिए समय नहीं होता है और ऐसी परिस्थिति में वह ‘निराश’ सा हो जाता है. कई बार तो उसे पता भी नहीं चलता कि उसे वास्तविक परेशानी है क्या?एकांत में रह कर आप चीज़ो को बेहतर ढंग से समझते है और इसी वजह से आप बेहतर फैसले ले पाते है।आपकी रचनात्मकता बढ़ती है। आपकी काम करने की क्षमता बढ़ती है और आप ज़्यादा रचनात्मक ढंग से अपना काम करते है।आप एकांत में रह कर हर तरह की तकलीफ और तनाव से मुक्त हो सकते है। एकांत में परिस्तिथियों को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।आप खुद को बेहतर ढंग से समझ पाते है। और आपको खुद में ही एक दोस्त मिल जाता है जो आपको समझता है। अकेले समय बिताने से आपकी एकाग्रता बढ़ती है और आप ज़िंदगी के नए अवसरों के बारे में सोच विचार कर सकते है।एकांत में समय बिताने से आप ज्यादा शाँत होते है और आप खुद की ज़िन्दगी की समीक्षा कर सकते है।

अकेले समय बिताना शायद थोड़ा बोरिंग लगे, पर इसके फ़ायदे बहुत होते है। आपको पूरे दिन में कम से कम एक घंटा अकेले एकांत में बिताना है। और ये एक घंटा सिर्फ आपका होगा। इसमें ना तो आप अपने फ़ोन का प्रयोग करेंगे और ना ही किसी और वस्तु का। इससे आपका सारा ध्यान आप पर होगा। कोशिश करे की आप ये एक घंटा सोने से पहले ले, इससे आपको नींद भी बेहतर आएगी और अगले दिन के लिए आप ज़्यादा सकारात्मक भी होंगे।

जब ये प्रक्रिया आपके नियमित कार्यक्रम का हिस्सा बन जाएगा तब आप संझेंगे की कैसे ये समय आपको बदल पाया है। खुद को समय देने से आपका ही फायदा होता है। आपको खुद के बारे में बेहतर महसूस होने लगेगा। इसलिए खुद के लिए समय निकाले और लोगो से हटकर, एकांत में रहना सीखे।

हमारे भारतीय शास्त्रों में भी ‘एकांतवास’ का कई जगहों पर ज़िक्र आता है। महात्मा बुद्ध की कथा किसे नहीं पता है? जब वह सांसारिक परिस्थितियों से खिन्न हो चुके थे, तब उन्होंने ज्ञान की खोज में ‘एकांतवास’ की शरण ली. पहले के ज़माने के राजा-महाराजा भी किसी समस्या का हल नहीं मिलने पर ‘एकांतवास’ में विचारमग्न होते थे और इस प्रकार तमाम चुनौतियों से पार पाने का साहस उनमें भर जाता था।

जब आप अकेले में जीवन की यात्रा में होते हैं, तो आपका ‘गंतव्य’ आपका इंतज़ार कर रहा होता है और अपने उस गंतव्य तक पहुँचने के लिए आप कुछ भी करने को तैयार भी रहते हैं. अकेलापन आपके अंदर के संकोच को दूर तो भगाता ही है, साथ ही साथ आपको साहसिक एवं मिलनसार बनाता है। जिसके चलते आप अपने जीवन में नए आयाम गढ़ने के लिए प्रोत्साहित होकर आगे बढ़ते हैं। मुश्किल तब आती है, जब कई बार आप अपने लक्ष्य को भूल जाते हैं. एक उदाहरण से कुछ यूं समझिये इसे कि आपको किसी एक वस्तु की आवश्यकता है और उसे खरीदने के लिए आप ‘शॉपिंग मॉल’ जाते हैं, पर वहां की चमक-दमक देख कर आप अपने जरूरत की वस्तु तो खरीदते नहीं हैं, हाँ उसकी बजाय कुछ और खरीद बैठते हैं. ठीक इसी प्रकार हमारा जीवन भी कई बार ‘भटकाव’ के दौर से गुजरता है और ऐसे में अकेलापन आपके ‘गंतव्य’ को पुनः प्रकाशित करता है।

अक्सर, जब हम अकेले होते है, एकांत में होते हैं, तो बाग-बगीचे और पार्कों जैसे स्थल हमारी पंसदीदा जगह होते हैं. जहां हम प्रकृति को महसूस कर सकते हैं. पक्षियों की सुबह की मधुर आवाज, सूरज का उज्ज्वल प्रकाश, फूल का स्पर्श इत्यादि प्राकृतिक सौन्दर्य से हमारा मन प्रसन्न हो उठता है. प्रकृति हमें शीतलता भी प्रदान करती है. अक्सर जीवन की व्यस्तताओं के बीच हम इन छोटी-छोटी बातों का आनंद लेना भूल जाते हैं, लेकिन जब आप अकेले होते हैं, तब प्रकृति के तमाम रूपों का आपको आनंद मिलता है. आखिर कौन होगा, जिसे प्रकृति का साथ नहीं भाता होगा?

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