नागरिकता संशोधन कानून को लेकर विचार विमर्श

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हल्द्वानी। हर साल की तरह इस बार भी आज 71 वें गणतन्त्र दिवस के मौके बनभुलपुरा में “अंजुमन शान-ए-वतन” की और से फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की नज़्म “हम देखेंगे” शीर्षक से सेमिनार का एहतेमाम किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने फ़ैज़ की कई क्रांतिकारी नज़्म पड़ी,सेमिनार में हमारे संविधान और देश में चल रहे नागरिकता संशोधन कानून को लेकर भी विचार विमर्श किया गया और वक्ताओं ने अपनी बात रखी जिसकी अध्यक्षता एडवोकेट निसार अंसारी ने की और संचालन सरताज आलम ने किया। जिसमे शराफत खान ने कहा कि 26 जनवरी 1950 को जो संविधान लागु हुआ वह दुनिया सबसे बेहतर दस्तूर है आज सरकार उसको बदलना चाहती है साम्प्रदायिकता फैलाकर संविधान में वर्णित पंथनिरपेक्षता के गुण को हटाना चाहते हैं शहीदों की सहादत के बाद हमे जो दस्तूर मिला है हम उसकी रक्षा करेंगे।
सरताज आलम ने कहा कि आज देश के नागरिकों के मानवाधिकार खतरें में हैं देश के मूल निवासियों से नागरिकता का प्रश्न किया जा रहा है उन्होंने कहा कि क्रांतिकारी शायर फ़ैज़ की नज़्म तानाशाही शासकों के खिलाफ एक ऊर्जा देती है वहीँ एडवोकेट निसार अंसारी ने सभी से अपने संविधान में वर्णित कर्तव्यों को पड़ने-समझने की ताक़ीद की और उसको आम नागरिकों को पहुंचाने की अपील की।सेमिनार में तसलीम अंसारी एडवोकेट मुजाहिद,शाहिद हलद्वानवी, ज़हीर अंसारी,हसनैन खतीबी,सुलेमान मलिक ,सलीम सैफी, मों साजिद सिद्दीकी, अलीम खान,एजाज़ अंसारी ने खिताब किया और नागरिकों को संविधान के अनुसार जागरूक करने का अहद लिया।

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