बजट पर नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने व्य‌क्त की प्रतिक्रिया

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हल्द्वानी। नेता प्रतिपक्ष डाॅ इंदिरा हृदयेश ने जारी बजट पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि बजट की घोषणा होते ही सेंसेक्स का बुरी तरह गिरना दर्शाता है कि बजट बाजार के अनुकूल नहीं है। कारपोरेट टैक्स में छूट दी गई है, लेकिन इन्कम टैक्स में मध्यम वर्ग के लिए कोई राहत नहीं दी गई है। इस तरह से उपभोग को बढ़ावा देने के लिए बजट में कोई प्रावधान नहीं किया गया है, जिससे मंदी से राहत मिल सके। कहा कि बैंकों में 5 लाख जमा राशि को ही इन्श्योर्ड किया गया है, उससे उपर की राशि के लिए क्या नीति होगी स्पष्ट नहीं किया गया है। जिससे मध्यम वर्ग में अविश्वास की भावना बढ़ गई है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा है कि चिकित्सा उपकरणों पर सेस लगाना उचित नहीं है। आयुष्मान योजना से भी मध्यम एवं निम्न वर्ग की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। मध्यम एवं निम्न स्तर के व्यापारी जटिल जीएसटी व्यवस्था से परेशान हैं। वर्तमान बजट में जीएसटी में बदलाव से उनकी और परेशानी बढ़ेगी। अपना बजट घाटा कम करने के लिए सरकार द्वारा एलआईसी, एयर इंडिया, टीएचडीसी आदि सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख सरकारी उपक्रमों को बेचने की योजना बनाना, देशहित में नहीं है। वहीं उन्होंने महंगाई पर भी सरकार पर निशाना साधा। कहा कि आर्थिक मंदी, बेरोजगारी व महंगाई के दौर में उत्तराखंड रोडवेज की बसों के किराये में मनमाने ढ़ंग से बेतहाशा वृद्धि ने एक और तोहफा दे दिया है। कहा कि रोडवेज बसों की यह हालत है कि नई खरीदी गई बसों में गियर लीवर टूटने लगे हैं और जब बसें दोबारा आयी तो बसों में बैक गियर नहीं लगने की समस्या उत्पन्न होने लगी। उत्तराखंड रोडवेज बसों की हालत अत्यन्त दयनीय है, ऐसी स्थिति में आम जनता के आवागमन का प्रमुख साधन जोकि बसें हैं, उनका किराया बढ़ाना ठीक नहीं है। सरकार द्वारा बसों की सुविधायें बढ़ाने और बेहतर परिवहन व्यवस्था हेतु अच्छी बसों की व्यवस्था करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाये जा रहे हैं, उस पर जनता के उपर बढ़े हुए किराये का बोझ लादने का काम किया जा रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि अतिशीघ्र बढ़े हुए किराये को वापस लिया जाय, अन्यथा मंदी, बेरोजगारी व महंगाई से पिसती जनता को सड़क पर उतरने को बाध्य होना पड़ेगा।

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