लॉकडाउन का पर्यावरण पर दिखने लगा सकारात्मक रूप, सांस लेने लायक हुई हवा

खबर शेयर करें

देहरादून। कोरोना संकट के चलते हर तरफ लॉकडाउन है। इसका असर कम से कम पर्यावरण पर सकारात्मक रूप से दिखने लगा है। उत्तराखंड के कई शहरों में वायु की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। सड़कों पर गाड़ियां पूरी तरह से नदारद हैं। उद्योग भी बंद हैं। यही स्थिति उत्तराखंड के आसपास के प्रदेशों में भी है। लॉकडाउन के दौरान प्रदेश के कुछ हिस्सों में मोसम भी बदला है। इसका पाजिटिव असर हवा की गुणवत्ता में सुधार के रूप में दिखाई देने लगा है।

कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के चलते पूरा देश लॉक डाउन किया गया है। इस लॉक डाउन का असर वायु प्रदूषण पर भी पड़ा है। इससे लोगों को स्वच्छ हवा का अहसास हो रहा है। इसका मुख्य कारण वाहनों की आवाजाही पर रोक और कारखानों व फैैक्टरी का बंद होना है। लॉक डाउन के पहले वाहनों की आवाजाही और कारखाना और फैक्टरी से निकलने वाला धुआं हवा की गुणवत्ता को कमजोर कर रहा था। अब 24 मार्च से हुए लॉक डाउन के बाद से अनावश्यक वाहनों की आवाजाही पर रोक लग गई है। कारखाने और फैक्टरी भी बंद कर दिए गए हैं। इसलिए वायु की गुणवत्ता में सुधार हो गया है। एक्यूआई घटने के कारण आसमान में धुंध दिखाई नहीं दे रही है। सांस लेने में भी कोई तकलीफ नहीं हैं। लॉक डाउन से जहां लोगों के कारोबार प्रभावित हुए हैं वहीं दूसरी ओर वातावरण में सुधार हो गया है। स्वच्छ हवा मिल रही है। ताजा डाटा के अनुसार, 103 शहरों में से 90 से अधिक शहरों में पिछले कुछ दिनों में न्यूनतम वायु प्रदूषण दर्ज किया गया है। नाइट्रोजन ऑक्साइड प्रदूषण का स्तर, जो श्वसन स्थितियों के जोखिम को बढ़ा सकता है वो भी कम हो गया है। एनओएक्स प्रदूषण मुख्य रूप से ज्यादा वाहनों के चलने से होता है। आम तौर पर मार्च में प्रदूषण मध्यम श्रेणी (एयर क्वालिटी इंडेक्स रेंज : 100-200) में होता है, जबकि वर्तमान में यह संतोषजनक (एक्यूआइ 50-100) या अच्छी (एक्यूआइ 0-50) श्रेणी का है। यह लॉकडाउन का प्रभाव है। उद्योग, निर्माण और यातायात को बंद करने जैसे स्थानीय कारकों ने वायु की गुणवत्ता को सुधारने में योगदान दिया है।
पर्यटन के चलते सालभर गुलजार रहने वाला नैनीताल लॉकडाउन के बाद से वीरान पड़ा है। हालांकि वीरानी के बीच एक सुखदायी खबर यह है कि नगर की शान नैनीझील की सेहत जलस्तर और प्रदूषण के लिहाज से दुरुस्त हुई है। साथ ही जैव विविधता पर भी अनुकूल असर पड़ा है।
लॉकडाउन के कारण न तो स्थानीय लोग घरों से ही शहर में सैलानी आ रहे हैं। वाहनों की आवाजाही काफी कम होने से प्राकृतिक जलस्रोत और नैनीझील प्रदूषित होने से काफी हद तक बच रही है। किलबरी रोड, पाइंस रोड, हनुमानगढ़ी और मनोरा क्षेत्र से सटे जंगलों में अवैध कटान बंद हो गया है। पशु-पक्षियों के शिकार के मामले भी नहीं आ रहे हैं। इससे जैव विविधता का भी संरक्षण हो रहा है। वहीं, पिछले साल की तुलना में झील का जलस्तर दो फुट से ज्यादा बढ़ा है। वर्ष 2019 के पहले सप्ताह में झील का जलस्तर साढ़े चार फुट था, जो वर्तमान में साढ़े छह फुट पहुंच गया है।
अप्रैल का पहला हफ्ता नैनीताल के लिए पर्यटक सीजन की तैयारियों वाला रहता था। नाव चालकों से लेकर होटल व्यवसायी तक सीजन की तैयारियों में जुटे जाते थे। लाखों सैलानी यहां सीजन में पहुंचते थे। प्रतिदिन शहर में तीन से चार हजार वाहनों का प्रवेश होता था। इससे प्रदूषण बढ़ने के साथ सड़कों पर वाहनों का दबाव रहता था। इस कारण लोअर माल रोड भी समय-समय पर दरकते रहते थी। फिलहाल माल रोड पर आवाजाही न के बराबर है। लॉकडाउन के चलते इस साल माल रोड पर वाहनों का दबाव निश्चित कम हुआ है। 90 से अधिक शहरों में पिछले कुछ दिनों में न्यूनतम वायु प्रदूषण दर्ज किया गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *