खास लोग जिंदगी को अलग रूप में देखने की दृष्टि देते है।

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एक सामान्य बच्चा यदि खास बच्चों के विषय में ये सोचता है, कि उसके साथ किस तरह पेश आऊँ और किस तरह से बात करूँ तो वह बच्चा बुद्धिजीवी बच्चों में से एक होता है।

एक खास बच्चा यदि अपनी बातें कह पाने में सक्षम होता यही कहता कि तुम मेरे साथ वैसे ही व्यवहार करो जैसे तुम एक सामान्य बच्चों से करते हो!और इसी सकारात्मक सोच को विकसित करने की धुन में प्रयत्नरत है,”शिवेंद्रालय स्पेशल स्कूल” की संचालिका श्रीमती भावना धौनी,जो स्वयं भी एक खास माँ है,उन्होंने मुंबई और लखनऊ के प्रतिष्ठित संस्थाओं से स्पेशल बी.एड एवं एम.एड कर दिव्यांग बच्चों के मानसिक, बौद्धिक और सामाजिक विकास के लिए निरन्तर कार्य कर रही है।

वह विशेष बच्चों की शिक्षिका ही नही एक निपुण कत्थक नृत्यांगना भी है। वह शिवेन्द्रालय में सांध्यकालीन संगीत एवं नृत्य की कक्षाएं भी लेती है।तथा किसी भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सामान्य बच्चों के साथ खास बच्चों को भी प्रतिभाग करवाकर समावेशी शिक्षा का अनुकूल माहौल तैयार कर रही है।इस तरह खास बच्चों के साथ सामान्य बच्चों के घुल मिलकर रहने से सभी बच्चों में बौद्धिक विकास तो होता ही है,बल्कि उनके हृदय में अच्छे इंसान बनने के मानवीय गुणों का अंकुरण भी होता है।

शिवेंद्रालय में एक सामान्य बच्चे के नजरों में स्पेशल बच्चा कोई अजूबा नही लगता,वे बिल्कुल सामान्य व्यवहार करते है, जैसे ऊपर वर्णित किस्से की भाँति “एक सामान्य बच्चा,खास बच्चे से बिलकुल सामान्य व्यवहार करता है।”

यही उद्देश्य समाज की भी होनी चाहिए कि वो भी सजगता से खास बच्चों के साथ पेश आएं।

खास बच्चों के निकट रहने वाले सामान्य बच्चों को नैतिक शिक्षा की पृथक से जरूरत नही होती।वे रोजमर्रा की जिंदगी में अपने खास भाई और बहिनों को देखकर स्वयं बहुत कुछ सीखते चले जाते है

वे बेहद ही संवेदनशील और केयरिंग हो जाते है,वे अपने ख़ास लोगों की परवाह ही नही अपने घर के बड़े लोगों के प्रति भी सेवा, शालीनता एवं आदर की भावना से पेश आते है

उत्थान मंच हीरानगर हल्द्वानी में चल रही उत्तरायणी कौतिक मेला में शिवेंद्रालय के सभी वर्ग के बच्चों ने बहुत ही लयबद्धता और जिस ख़ूबसूरती से उत्तराखंड के इतिहास को नृत्य नाटिका के जरिये प्रस्तुत किया ….वह मन को मोहित करने वाला था

निःसंदेह भावना मैडम और उसकी पूरी टीम को ही नही… उन सभी बच्चों को भी बधाई! जिन्होंने खास बच्चों को संभालते हुए अपनी कार्यक्रम से इतर एक अच्छे हृदय के मालिक होने की भूमिका भी निभायी और समाज रुपी दर्शकगणों को भी सकारात्मक संदेश देने में सफल रहे!

खास लोग जिंदगी को अलग रूप में देखने की दृष्टि देते है।
मन को सादगी युक्त कर शांति से अपने उद्देशों में चलने के लिए प्रेरित करते है। तथा जीवन को सुखद रुप से पोषित एवं पल्लवित करते है।

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