सीएए-एनपीआर-एनआरसी के खिलाफ किए हस्ताक्षर

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हल्द्वानी। सीएए-एनपीआर-एनआरसी के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान को सफल बनाने के लिए  संविधान बचाओ मंच की अम्बेडकर नगर पंचायत घर में आयोजित बैठक में मौजूद लोगों ने हस्ताक्षर प्रपत्र पर हस्ताक्षर किए और अपने-अपने क्षेत्र में हस्ताक्षर अभियान को तेज करने का संकल्प लिया।

सीएए-एनपीआर-एनआरसी के खिलाफ संविधान बचाओ मंच द्वारा एक लाख हस्ताक्षरों से युक्त ज्ञापन राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को भेजा जाएगा। इस दौरान अम्बेडकर मिशन के अध्यक्ष जीआर टम्टा ने कहा कि देश के संविधान में इस बात की गारंटी दी गई है कि भारत के लोग वोट देकर अपनी सरकार चुनें और उसे अपने हिसाब से चलायें। संविधान इस बात की इजाजत नहीं देता कि सरकार तय करे कि देश में किन्हें वोट का हकदार माना जायेगा और किन्हें नहीं। यदि यह होता है तो यह संवैधानिक संस्थाओं और लोकतंत्र को खत्म करने की बात होगी।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए युवा जाटव समाज एकता अम्बेडकर मिशन कमेटी के अध्यक्ष लक्ष्मी नारायण ने कहा कि बाबा साहब डॉ अम्बेडकर के नेतृत्व में बना भारतीय संविधान भाजपा की मनुवादी राजनीति को देश में लागू करने में सबसे बड़ी बाधा है, इसलिए यह सरकार संविधान को ही किनारे करना चाहती है। संविधान के मूल ढांचे पर चोट करते हुए इस सरकार ने संविधान विरोधी नागरिकता संशोधन कानून को पारित किया और देश को गरीब विरोधी, दलित विरोधी, आदिवासी विरोधी, मुस्लिम विरोधी सीएए-एनपीआर-एनआरसी पैकेज की ओर धकेल दिया है।

भाकपा (माले) के राज्य सचिव राजा बहुगुणा ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून संविधान की बुनियाद पर हमला है जिस पर मोदी सरकार एनपीआर और एनआरसी की इमारत खड़ी करना चाहती है। मोदी सरकार भूल रही है कि जिस संसदीय बहुमत की आड़ में आज वह संविधान की मूल प्रस्थापना धर्मनिरपेक्षता से खिलवाड़ कर रही है, वह उसी संविधान की शपथ लेकर सत्ता में आयी है। चेत राम सागर ने कहा कि जब से यह सरकार सत्ता में आयी है तब से मोदी सरकार ने जनता के सवालों पर वादाखिलाफी की है। रोजगार, आर्थिक मंदी, महंगाई, गरीबी जैसे बुनियादी सवाल पीछे कर दिए गए हैं और भाजपा ने हर मसले को सांप्रदायिक राजनीति का शिकार बना दिया है। बैठक में सुंदर लाल बौद्ध, चेत राम सागर, जी.आर. टम्टा, धर्मवीर जाटव, एम आर चन्याल, गुमानी राम टम्टा, सोन पाल सागर, मुकेश बौद्ध, मनीष गौतम, प्रताप सागर, शेखर सरन, राकेश कुमार, डॉ कैलाश पाण्डेय आदि ने भी विचार व्यक्त किए।

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