उपेक्षा का दंश झेल रहा ‌ब्रिटिश कालीन बावन डांठ

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हल्द्वानी। सिंचाई विभाग की अनदेखी के चलते सिंचाई नहरें जर्जर हो चुकी हैं। ‌ब्रिटिशकालीन नहरें देखने को किसी समय फतहपुर के पास लोगों का जमावड़ा लगा रहता था, तो वह वहीं नहरें अपनी ही बदहाली पर आसूं बहा रही हैं।

आलम यह है कि आज इन्हें न तो कोई देखने वाला है और न ही इनकी कोई सुध ले रहा है। हल्द्वानी में एक समय में सिंचाई नहरों का जाल हुआ करता था। किंतु धीरे-धीरे इन नहरों का अस्तित्व ही समाप्त सा होता जा रहा है। नहरें विभाग की उपेक्षा का दंश झेल रही हैं।

बात ब्रिटिशकालीन नहरों की करें तो हल्द्वानी से लगभग 7 किमी दूर फतेहपुर से बसानी जाने वाले मार्ग पर ऐतिहासिक धरोहर 52 डांठ ब्रिटिशकालीन सिंचाई नहर है, जो कि आज सिंचाई विभाग की अनदेखी के कारण जर्जर हाल में पहुंच गयी है।

ब्रिटिशकालीन नहर को बनाने में 52 पिलर का सपोर्ट दिया गया है। इस तकनीक को देखने के लिए दूरदराज से लोग आते हैं। सिंचाई विभाग की अनदेखी के कारण नहर के पिलर व दीवारों पर घास तक उग आई है। सिंचाई विभाग द्वारा नहर का आज तक कोई भी मरम्मत कार्य न करना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। जबकि यह नहर ऐतिहासिक धरोहर होने के साथ ही सैंकड़ों किसानों को सिंचाई हेतु पानी उपलब्ध कराने का एकमात्र माध्यम है। राम चरण शरणम् ट्रस्ट के संस्थापक स्वामी नयन दास जी द्वारा इस ऐतिहासिक धरोहर ब्रिटिशकालीन नहर के रख-रखाव व मरम्मत कार्य ट्रस्ट के माध्यम से कराने के लिए सिंचाई विभाग से अनुमति मांगी है। यदि सिंचाई विभाग अनुमति देता है तो इस ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण ट्रस्ट के माध्यम से किया जायेगा।

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