बाजार से गायब हो चुके हैं मास्क और सैनिटाइजर

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देहरादून। कोरोना वायरस को उत्तराखंड राज्य में महामारी घोषित किया जा चुका है। वायरस से बचाव के लिए प्रयुक्त किए जाने वाले मास्क व सैनिटाइजर बाजार से गायब हो चुके हैं। मगर अभी तक औषधि नियंत्रण विभाग के अधिकारी जमाखोरी पर ही नियंत्रण नहीं लगा पाए। बाजार में इन दिनों सैनिटाइजर के नाम पर कुछ भी परोस दिया जा रहा है और मास्क भी ऐसे हैं, जो मानकों पर खरे नहीं उतरते। जब लोगों को विकल्प नहीं मिल रहे हैं तो वह मजबूरी में कुछ भी खरीद कर ले आ रहे हैं और उनके हितों की रक्षा भी नहीं हो पा रही। सैनिटाइजर व मास्क की कालाबाजारी को लेकर अब जाकर औषधि नियंत्रण विभाग की नींद टूटती दिख रही है। औषधि अनुज्ञापन अधिकारी गढ़वाल एसएस भंडारी ने देहरादून, हरिद्वार और रुड़की में सेनिटाइजर निर्माताओं के साथ बैठक की और उनसे डिस्ट्रीब्यूटरों को दिए गए स्टॉक का ब्योरा तलब किया। हालांकि, मास्क की कालाबाजारी पर सवाल अब भी बरकरार है। औषधि अनुज्ञापन अधिकारी भंडारी ने बताया कि हरिद्वार में अग्रवाल ड्रग्स, जेनिका ड्रग्स व देहरादून के सेलाकुई में डीफोक्सिल सेनिटाइजर की निर्माता कंपनी हैं। कंपनी संचालकों से डिस्ट्रीब्यूटर्स को दिए गए स्टॉक का ब्योरा तलब करने के साथ ही समस्त होलसेल एवं रिटेलर्स की जानकारी भी मांगी गई है। उन्होंने कहा कि अगर कोई कालाबाजारी करता मिलता है तो उस पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। निर्देश जारी किए गए हैं कि ओवररेटिंग बिल्कुल न करें और गुंजाइश बनती है तो इससे कम दर पर भी इन उत्पादों को उपलब्ध कराया जाए।

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