इन 7 महिलाओं ने की पीएम मोदी के इस नए पहल की तारीफ, जानें किसने क्या कहा

खबर शेयर करें

वे सालों और दशकों से जल संरक्षण, स्वच्छता और दिव्यांगता अधिकार से जुड़े मुद्दों पर काम कर रही थीं लेकिन उनके संदेशों को कभी भी ऐसा प्रसार और विस्तार नहीं मिला था जैसा कि रविवार को तब मिला जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें अपने सोशल मीडिया अकाउंट का इस्तेमाल उनकी कहानियों को साझा करने के लिये दिया। कानपुर की रहने वाली स्वच्छता कार्यकर्ता कलावती देवी, बिहार के मुंगेर की रहने वाली वीणा देवी, ग्रामीण महाराष्ट्र के बंजारा समुदाय की कलाकृतियों को बढ़ावा देने वाली विजया पवार और परंपरागत कश्मीर कला को बढ़ावा देने वाली अरीफा जान ट्विटर पर नहीं हैं लेकिन उनका काम दिन भर इस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चर्चा का विषय बना रहा ।

उन्होंने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का आह्वान किया और लोगों ने उनके कामों से जुड़ने का अनुरोध किया। जान ने कहा, “जब परंपरा और आधुनिकता का मिलन होता है तो चमत्कार हो सकता है। मैंने इसका अपने काम में अनुभव किया। यह आधुनिक बाजार के मुताबिक डिजाइन किया गया है। मेरी पहली कारोबारी गतिविधि नयी दिल्ली में हस्तनिर्मित सामानों की एक प्रदर्शनी में हिस्सा लेना था। इस प्रदर्शनी में अच्छे खासे ग्राहक आए और आकर्षक कारोबार हुआ।”इस पहल के लिये मोदी की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि इससे उन्हें कश्मीर में कला और कलाकारों की बेहतरी के लिये और मेहनत करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि यह दूसरी महिलाओं के लिये महत्वपूर्ण है कि वे आत्म निर्भर बनें और दूसरी महिलाओं की भी मदद करें।”लोगों ने मालविका अय्यर की प्रेरक कहानी भी सुनी। वह 13 साल की उम्र में एक बम धमाके का शिकार बनीं जिसमें उनके हाथ उड़ गए और पैर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। उन्होंने प्रधानमंत्री के ट्विटर हैंडल पर लिखा, “छोड़ देना कभी कोई विकल्प नहीं होता। अपनी सीमाओं को भूलकर विश्वास और उम्मीद के साथ दुनिया का सामना कीजिए…मेरा मानना है कि शिक्षा बदलाव के लिये अपरिहार्य है।”अय्यर एक प्रेरक वक्ता, दिव्यांग कार्यकर्ता और मॉडल हैं।इन लोगों की प्रेरक कहानियों और संदेशों के बीच लोगों की टिप्पणियों पर जब इन्होंने जवाब दिया तो इस दौरान हास्य-विनोद के भी कई पल आए। जिस वक्त इन महिलाओं में से एक महिला अकाउंट संभाल रही थी तब एक ट्विटरयूजर ने उनसे अकाउंट का पासवर्ड पूछा जिस पर जवाब दिया गया, ‘‘नया भारत, लॉगइन करने की कोशिश कीजिए।

’’स्नेहा मोहनदौस ने जब अपनी कहानी साझा की तो एक ट्विटर यूजर ने इस कवायद की सराहना करते हुए कहा इसे ‘‘नेक प्रयास’’ करार देते हुए मोदी को ‘‘इन महिलाओं और इनकी प्रेरक कहानियों से रूबरू कराने’’ के लिये लिये शुक्रिया कहा।स्नेहा ने लोगों से बेघरों को खाना खिलाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा, ‘‘मैं भूख को मिटाने को लेकर जागरुकता फैलाने के लिये प्रधानमंत्री के हैंडल का इस्तेमाल कर रही हूं। क्या आप और अन्य लोग मेरी मदद करेंगे? यह आसान है। भूखों को भोजन कराइए और यह सुनिश्चित करें कि खाना बर्बाद न जाए।’’जल संरक्षक कल्पना रमेश ने कहा, “छोटे प्रयास बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं…पानी को जिम्मेदारीपूर्वक खर्च कर, वर्षाजल संचयन, झीलों को बचाकर, इस्तेमाल पानी का पुनरू उपयोग और जागरुकता फैलाकर योगदान किया जा सकता है।”उन्होंने मोदी के हैंडल से ट्वीट किया, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं पक्षियों को झील में वापस ला पाउंगी या हमारे प्रधानमंत्री के ट्विटर हैंडल से ट्वीट करूंगी। दृढ़ संकल्प से असंभव हासिल किया जा सकता है। हम जल संसाधन का प्रबंधन कैसे करते हैं इस दिशा में सामूहिक कार्रवाई कर समुदायों में बदलाव ला सकते हैं।”इन महिलाओं में से कुछ के ट्विटर अकाउंट पर फालोअरों की संख्या में आज खासा इजाफा देखने को मिला। एक यूजर ने जब इस ओर ध्यान दिलाया कि ट्विटर पर मोहनदौस के फालोअरों की संख्या दोगुनी हो गई है तो उन्होंने उम्मीद जताई कि भूखे लोगों की मदद करने वाले लोगों की संख्या भी अब दोगुनी हो जाएगी ऐसी उम्मीद करती है मेरे फालोअर अब मेरे ध्येय को भी अपनाएंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *