वो दिन ऐसे थे…

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स्टेडियम हल्द्वानी के निकट स्थित ऑफिसर्स कॉलोनी मैं मुझे सबसे खूबसूरत आवास आवंटित हुआ था, जहां के बरामदे से खेल मैदान में खेलते-कूदते बच्चों में अपने बच्चों को भी देखना मुझे बहुत अच्छा लगता था।

मै,अकसर शाम की चाय वही बैठकर पीना पसन्द करती थी। क्योंकि चाय के साथ फ़ोन कॉल्स भी चेक कर लिया करती थी।

तब मेरा फेसबुक एकाउंट बंद ही रहता था, पासवर्ड जो भूल गयी थी। दोबारा एक्टिवेट करने की प्रक्रिया मुझे मालूम नहीं थी।

कुछ देर बाद ही मेरी दोस्त सोनी का फ़ोन आया- हाय आभा! व्हाटस अप?

फाइन यार!

कहां हो तुम ? मैंने पूछा

अभी मैं ठंडी सड़क में स्थित एक रेस्त्रां में हूं, साथ मैं एक सेलिब्रिटी भी है।

वो कह रहें है कि आभा मेरी क्लास फेलो है।

जब तुम पिथौरागढ़ में थी- एक ही सांस में ही वह बोल पड़ी।

ओह! अच्छा, कौन है वो हस्ती..? मैंने कौतुकवश पूछा!

वो, हँसती हुई बोली- क्या… सब यही बता दूं?

कुछ तो सस्पेंस के लिए छोड़ देती हूं यार।

अभी हम लोग आ रहे हैं तुझसे मिलने।

हम लोग मतलब कितने ???

चार लोग -सोनी बोली

अच्छा आ जाओ, ये कह कर मैं अपने कमरे में आ गयी।

जब कोई घर आने की बात करे तो थोड़ा आईना-वाईना देख कर अपना बाल-वाल, ड्रेस चेक करना तो सभी औरतों का बेसिक नेचर होता ही है।

अब कोई सेलिब्रिटी भी सोनी के साथ हमारे आवास में आ रहा हो, जो मुझे नहीं मालूम….तो जरा कायदे से खुद का मुआयना जरूरी हो जाता है।

आधा घण्टा हो गया,दरवाजे की बेल ही नहीं बजी।

मुझे लगा दस मिनट के रास्ते को तय करने में आधा घण्टा….खैर,

जरा दिमाग पर जोर पड़ रहा था।

मैं, बरामदे से सड़क पर झांक रही थी, कि बेल बज उठा।

मुख्य द्वार की ओर बढ़कर दरवाजा खोला।

तो सोनी खिलखिलाती हुई भीतर आ गयी।पीछे से लवराज धर्मसत्तु और दो लोग भी मुस्काराते हुए अंदर आ गए।

मेहमानों के खिदमत की औपचारिकतायें चल रही थी।मेरी भतीजी चाय बना लायी। हल्की फुलकी बातें भी हो रही थी।

मैंने तपाक से पूछ लिया-इतनी देर कैसे हो गयी सोनी?

ठंडी सड़क से यहां पहुंचने में तो केवल दस मिनट लगते हैं।

सब मेरा मुंह देख कर हँसने लगे। मुझे कुछ समझ नहीं आया।

अरे, आभा! हम सब समय से पहुंच गए थे।

दरवाजे में एक -तुम आगे जाओ यार!

दूसरा-नही, तुम पहले जाओ।

सोनी-नो, लवराज पहले जाएगा।

नही, सोनी तुम जाओ।

तुम जाओ!

तुम जाओ के चक्कर में देर हो गयी।

हाहाहाहाहाहा हंसी से पूरा घर गूंज उठा।

ओह, तो ये बात है।

आप लोगों का हम जैसे साधारण प्राणी से मिलने आना ही बहुत बड़ी बात है।

आप सेलिब्रिटी हो।

आपसे पंक्तिबद्व होकर मुझे मिलने आना चाहिए था।

आप सब आये।

मेरा सौभाग्य है!

लवराज बोला- मैं,तो आपको पिथौरागढ़ डिग्री कॉलेज के जमाने से जानता हूं।

मुझे थोड़ा आश्चर्य हुआ, फिर अपने पैर पर जरा सा कुल्हाड़ी मारने जैसा सवाल पूछ लिया-पर मैंने तो आपको कभी देखा ही नही!

वो हंसते हुए बोला-खूबसूरत लडकियां किसी को देखती ही नहीं हैं।

मैं, खिसिया सी गयी थी।

मैं, और खूबसूरत, क्या बात कर रहे हो। ऐसी तो कोई बात ही नहीं थी, मेरा बोलचाल लड़कों से बिल्कुल नहीं था।

हमारे ग्रुप में सात-आठ शैतान सी दादागिरी टाइप की लड़कियां हुआ करती थी।

जो लड़कों को उधर तंग करते थे,बेचारे लड़के ही हम लोगों से डरा करते थे।

इस वजह से भी हम लडकियां किसी से सीधी मुंह बात ही नही करती थी। सच कहूं तो मुझे अपने क्लास का कोई भी लड़का आज भी याद नही है। मैंने अपना स्पष्टीकरण देते हुए बोली।

अच्छी यादें हर किसी के जेहन में हमेशा रहती है।

एक महान एवरेस्टर और आज जर्मनी में रह रही सोनी के साथ बैठकर (तब 2014 की एक शाम ) अपने कॉलेज के दिनों को याद करना एक अविस्मरणीय अनुभव था।

 कुछ तस्वीरों से 

 यादों की धूल 

 जब हटती है,

 चित्र और भी 


 खूबसूरत दिखती है।

श्रीमती आभा बोहरा
पीसीएस 1998 बेच उत्तराखंड कैडर

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